गोपाष्टमी के दिन कृष्‍ण ने पहली बार चराई थी गाय, इस विधि से पूजन करने पर गौ माता देती हैं आशीर्वाद

Gopashtami Puja Vidhi: गोपाष्टमी मुख्य रूप से वृंदावन, मथुरा और ब्रज क्षेत्र में मनाया जाने वाला उत्सव है। इस दिन गाय, बछड़े और ग्वालों की विशेष पूजा की जाती है।

हिंदू मान्‍यता के अनुसार गोपाष्टमी एक प्रमुख त्‍यौहार है। यह कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष अष्टमी को मनाया जाता है। आज के दिन गाय और श्री कृष्‍ण की पूजा की जाती है। माना जाता है कि आज की के दिन श्रीकृष्ण ने पहली बार गाय चराई थी। गोपाष्टमी मुख्य रूप से वृंदावन, मथुरा और ब्रज क्षेत्र में मनाया जाने वाला उत्सव है। इस दिन गाय, बछड़े और ग्वालों की विशेष पूजा की जाती है। ऐसा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। माना जाता है कि गाय के शरीर में देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए गो पूजन से सभी देवता प्रसन्न होते हैं। गोपाष्टमी के दिन ग्वालों को दान करना चाहिए। गाय को हरा चारा एवं गुड़ खिलाना चाहिए।

गोपाष्टमी पूजा विधि

  • गोपाष्‍टमी के दिन सवेरे उठ कर गौ माता को स्नान करवाएं।
  • उसके बाद गाय को तिलक लगाए और प्रणाम करें।
  • इसके बाद उनको पुष्प, अक्षत्, धूप अर्पित करें।
  • फिर ग्वालों को दान देकर उनका पूजन करें।
  • गाय को प्रसाद खिलाएं और परिक्रमा करें।
  • परिक्रमा करने के बाद गायों के साथ कुछ दूर जाएं। ऐसा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

घर की सुख-समृद्धि बढ़ाने के लिये करें ये काम 
प्रात: स्नान करेन के बाद अगर आप गो माता को स्पर्श करें तो इंसान को सभी पापों से मुक्‍ति मिलेगी। गाय की सेवा करने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ेगी। यही नहीं अगर गाय के पैरों में लगी मिट्टी का तिलक लगा लिया जाए तो तीर्थ का पुण्य प्राप्त हो सकता है।

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