भुवनेश्वरी जयंती: ब्रह्मांड की रानी मां भुवनेश्वरी की इस विधि से करें पूजा, मिलेगा चमत्कारी लाभ

भुवनेश्वरी का अर्थ है ब्रह्मांड की रानी। मां भुवनेश्वरी ब्रह्मांड को एक कोमल फूल की तरह संभालती हैं। आज ही के दिन पृथ्वी पर उनका अवतरण हुआ था। यहां जानें उनकी पूजा विधि…

मुख्य बातें

  • भुवनेश्वरी जयंती के दिन देवी भुवनेश्वरी का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था
  • वह दस महाविद्याओं में से चौथी हैं
  • भुवनेश्वरी का मतलब है ब्रह्मांड की रानी

Bhuvaneshwari jayant: भुवनेश्वरी जयंती के दिन देवी भुवनेश्वरी का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। वह दस महाविद्याओं में से चौथी हैं। भुवनेश्वरी जयंती आज यानि 10 सितंबर को मनाई जा रही है। यह देवी शक्ति का एक शक्तिशाली अवतार हैं और पूरे भारत में उनकी पूजा की जाती है।

भुवनेश्वरी का अर्थ है ब्रह्मांड की रानी। संपूर्ण ब्रह्मांड उनका शरीर है और वह सभी प्राणी को आभूषण के रूप में धारण किये होती हैं। भुवनेश्वरी जयंती शुक्ल पक्ष द्वादशी के दिन या 12 वें दिन मनाई जाती है। उत्तर भारत के तमाम शक्ति मंदिरों में आज के दिन विशेष पूजा की जाती है।

भुवनेश्वरी जयंती का महत्‍व 
भुवनेश्वरी का मतलब है ब्रह्मांड की रानी। वह पूरे ब्रह्मांड की पर राज करती हैं। वे अपनी इच्‍छा अनुसार चीजों को नियंत्रण करती हैं। वह ब्रह्मांड को एक कोमल फूल की तरह संभालती हैं और उसकी रक्षा करती हैं।

भुवनेश्वरी देवी की पूजन विधि- 
शिव के मंदिर जा कर देवी का दशोंपचार पूजन करें। कर्पूर जला कर धूप बत्‍ती लगाएं, सफेद रंग के फूल, चावल, चंदन, दूध, शहद व इत्र चढ़ाएं। इसके साथ ही मावे का भोग लगा कर 1 माला का मंत्र जाप करें। पूजा समाप्‍त होने के बाद भोग किसी स्‍त्री को भेंट कर दें।

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