Vaman jayanti: आज होगी भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा, सुखी जीवन के लिये करें चावल-दही और शक्कर का दान

वामन द्वादशी भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की द्वादशी को होता है। 10 सितंबर दिन मंगलवार को वामन द्वादशी है। इस दिन व्रत और कुछ खास दान का विशेष महत्व होता है।

मुख्य बातें

  • वामन देव की पूजा दोपहर के समय की जाती है
  • शाम के समय फिर से पूजा कर कथा सुनना जरूरी है
  • व्रत के बाद दान करना भी बहुत जरूरी होता है

वामन द्वादशी या वामन जयंती भगवान वामन का प्राकट्य के उत्सव में मनाया जाता है। वामन भगवान विष्णु के अतवार हैं। वामन द्वादशी के दिन व्रत रखना और दान का बहुत महात्मय होता है। श्रवण नक्षत्र के अभिजित मुहूर्त में भगवान श्री विष्णु ने एक अन्य रुप वामन का अवतार लिया था। इस दिन भगवान श्री विष्णु कि समस्त लीलाओं, भागवत कथा और वामन अवतार कि कथा को सुनना चाहिए।

व्रत का संकल्प लेकर भगवान वामन का पंचोपचार अथवा षोडषोपचार पूजा की जाती है। इसके बाद दान किया जाता है। यह पूजा और व्रत समस्त कष्टों से मुक्त करने वाली मनोकामना पूर्ण करने वाला होता है। तो आइए जाने वामनदेव की पूजा कैसे कि जानी चाहिए।

ऐसे करें व्रत और पूजा कि शुरुआत

  • व्रत दिन व्रत का संकल्प लेना बहुत जरूरी होता है। स्नान करने के बाद प्रभु के समक्ष उपस्थित हो कर व्रत का प्रण लें।
  • वामन भगवान का जन्म दोपहर यानीअभिजित मुहूर्त में हुआ था, इसलिए उनकी पूजा भी इसी समय करना चाहिए।
  • भगवान विष्णु के वामन रूप की प्रतिमा की पूजा करें और दक्षिणावर्ती शंख में गाय का दूध लेकर उनका अभिषेक जरूर करें,क्योंकि ऐसा करने से आपकी परेशानियां दूर होंगी।
  • इसके बाद एक बर्तन में चावल, दही और शक्कर रख कर भगवान को अर्पित करें और बाद में इसे ब्राह्मण को दान कर दें।
  • वामन भगवान की पूजा शाम को भी करनी चाहिए। इसके लिए दोबारा स्नान करें और पूजा करने के बाद भगवान की कथा सुने या पढ़े।
  • पूजा और व्रत तभी सफल माना जाता है जब इस दिन गरीबों को भोजन करा जाए। भोजन न करा सकें तो फल का दान करें।

वामन अवतार की कथा
भगवान विष्णु के कई अवतार में से वामन अवतार को बससे महत्वपूर्ण अवतार माना गया है। इस अवतार के पीछे श्रीमद्भगवद पुराण बताया गया है कि देव और दैत्यों के युद्ध में जब देव पराजित होने लगे और असुर सेना अमरावती पर आक्रमण करने लगी। तब इंद्रदेव भगवान विष्णु से सुरक्षा की मांग करने उनके शरण में जा पहुंचे। तब भगवान ने उन्हें धैर्य दिलाया और कहा कि वह माता अदिति के गर्भ से वामन रूप में जन्म लेकर दैत्यराज बलि से मुक्ति दिलाएंगे। इसके लिए महार्षि कश्यप के सहयोग से माता अदिति पयोव्रत का अनुष्ठान करती हैं, ये अनुष्ठान पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाता है।

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